Skip to content
SarvaKosh
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 135 of 1063

Read in context
Page 135

तीक्ष्णीयांसः परशोरग्नेस्तीक्ष्णतरा उत.
इन्द्रस्य वज्रात् तीक्ष्णीयांसो येषामस्मि पुरोहितः.. (४)
मैं जिन राजाओं का पुरोहित हूं, वे तेज धार वाले फरसे से भी अधिक शत्रु के छेदन में
समर्थ हों तथा अग्नि से अधिक शत्रु सेना को भस्म करने वाले बनें. वे राजा इंद्र के वज्र से भी
अधिक तीक्ष्ण बनें अर्थात् उन की गति कहीं रुके नहीं. (४)
एषामहमायुधा सं स्याम्येषां राष्ट्रं सुवीरं वर्धयामि.
एषां क्षत्रमजरमस्तु जिष्णवे ३ षां चित्तं विश्वे ऽ वन्तु देवाः.. (५)
मैं अपने राजाओं के आयुधों को तेज धार वाला बनाता हूं तथा इन के राज्य को शोभन
वीरों से युक्त करता हूं. इन का शारीरिक बल, बुढ़ापे से रहित तथा शत्रुओं को जीतने वाला
हो. इन के युद्धोन्मुख मन की सभी देव रक्षा करे. (५)
उद्धर्षन्तां मघवन् वाजिनान्युद् वीराणां जयतामेतु घोषः.
पृथग् घोषा उलुलयः केतुमन्त उदीरताम्.
देवा इन्द्रज्येष्ठा मरुतो यन्तु सेनया.. (६)
हे इंद्र! तुम्हारी कृपा से हमारी हाथियों, घोड़ों और रथों वाली सेना युद्ध में हर्षित रहे.
विजय प्राप्त करने वाले हमारे वीरों का जयघोष शत्रुओं के कानों को बहरा बनाता हुआ उठे.
सब से पृथक् एवं सभी के द्वारा जाने गए जयघोष फैलें. इंद्र जिन में सब से बड़े हैं, ऐसे मरुत्
युद्ध में हमारी सहायता करने के लिए अपनी सेना ले कर आएं. (६)
प्रेता जयता नर उग्रा वः सन्तु बाहवः.
तीक्ष्णेषवो ऽ बलधन्वनो हतोग्रायुधा अबलानुग्रबाहवः.. (७)
हे सैनिको! युद्ध भूमि की ओर बढ़ो तथा देवों की कृपा से शत्रुओं पर विजय प्राप्त करो.
तेज धार वाले आयुधों को धारण करने वाली तुम्हारी भुजाएं शक्तिशालिनी बनें और शक्ति
रहित आयुधों को धारण करने वाले तथा बलहीन शत्रुओं का विनाश करें. (७)
अवसृष्टा परा पत शरव्ये ब्रह्मसंशिते.
जयामित्रान् प्र पद्यस्व जह्येषां वरंवरं मामीषां मोचि कश्चन.. (८)
हे बाण! तू मंत्रों के द्वारा तीक्ष्ण बनाया गया है तथा शत्रुओं के विनाश में कुशल है. तू
हमारे धनुष से छूट कर शत्रु सेना की ओर जा कर गिर और उन के शरीर में प्रवेश कर के उन
की उत्तम सेना का विनाश कर. शत्रु सैनिकों में से कोई भी बचने न पाए. (८)
सूक्त-२० देवता—अग्नि
अयं ते योनिर्ऋत्वियो यतो जातो अरोचथाः.