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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 130 of 1063

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Page 130

जिस मूल धन से मैं लाभ रूपी धन की इच्छा करता हुआ व्यापार करता हूं, इंद्र,
सविता, सोम, प्रजापति और अग्नि देव मेरा मन उस धन की ओर प्रेरित करें. (६)
उप त्वा नमसा वयं होतर्वैश्वानर स्तुमः.
स नः प्रजास्वात्मसु गोषु प्राणेषु जागृहि.. (७)
हे देवों का आह्वान करने वाले अग्नि देव! हम हव्य ले कर तुम्हारी स्तुति करते हैं. तुम
हमारे पुत्रों, पौत्रों, गायों और प्राणों की रक्षा के लिए सावधान रहो. (७)
विश्वाहा ते सदमिद्धरेमाश्र्वायेव तिष्ठते जातवेदः.
रायस्पोषेण समिषा मदन्तो मा ते अग्ने प्रतिवेशा रिषाम.. (८)
हे जातवेद अग्नि! हमारे घर में नित्य निवास करने वाले तुम्हें हम प्रतिदिन उसी प्रकार
हवि देते हैं, जिस प्रकार हम अपने घर में रहने वाले घोड़े को समयसमय पर घास आदि
खिलाते हैं. हे अग्नि! तुम्हारे सेवक हम धन और अन्न की समृद्धि से प्रसन्न होते हुए कभी नष्ट
न हों. (८)
सूक्त-१६ देवता—इंद्र, अग्नि
प्रातरग्निं प्रातरिन्द्रं हवामहे प्रातर्मित्रावरुणा प्रातरश्विना.
प्रातर्भगं पूषणं ब्रह्मणस्पतिं प्रातः सोममुत रुद्रं हवामहे.. (१)
हम शक्ति और बुद्धि प्राप्त करने के निमित्त प्रातःकाल अग्नि, इंद्र, मित्र, वरुण, भग,
उषा, बृहस्पति, सोम और रुद्र का आह्वान करते हैं. (१)
प्रातर्जितं भगमुग्रं हवामहे वयं पुत्रमदितेर्यो विधर्ता.
आध्रश्चिद् यं मन्यमानस्तुरश्चिद् राजा चिद् यं भगं भक्षीत्याह.. (२)
जो आदित्य वर्षा आदि के द्वारा सब के धारण कर्ता और पोषण करने वाले हैं. दरिद्र भी
जिन्हें अपने अभिमत फल का साधन जानता हुआ पूजा करता है तथा राजा भी जिन्हें पूजने
का इच्छुक रहता है, हम प्रातःकाल उन अदिति पुत्र एवं अपराजित शक्ति वाले सूर्य का
आह्वान करते हैं. (२)
भग प्रणेतर्भग सत्यराधो भगेमां धियमुदवा ददन्नः.
भग प्र णो जनय गोभिरश्वैर्भग प्र नृभिर्नृवन्तः स्याम.. (३)
हे सूर्य! तुम सारे जगत् के नेता हो. तुम्हारा धन कभी नष्ट नहीं होता. हमारी स्तुति को
तुम सफल करो. हे भग! हमें गायों और घोड़ों से संपन्न करो. हम पुत्र, पौत्र, सेवक आदि
मनुष्यों वाले बनें. (३)
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