अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextअहर्जातस्य यन्नाम तेना वः सं सृजामसि.. (१)
हे गायो! मैं तुम्हें सुखपूर्ण गोशाला से युक्त करता हूं तथा तुम्हें आहार रूपी धन प्रदान
करता हूं. मैं तुम्हें पुत्र, पौत्र आदि संतान से युक्त करता हूं. (१)
सं वः सृजत्वर्यमा सं पूषा सं बृहस्पतिः.
समिन्द्रो यो धनञ्जयो मयि पुष्यत यद् वसु.. (२)
हे गायो! अर्यमा, उषा एवं धन जीतने वाले इंद्र तुम्हें उत्पन्न करें. इस के पश्चात तुम
अपने दूध, घी आदि धन से मुझे पुष्ट करो. (२)
संजग्माना अभिभ्युषीरस्मिन् गोष्ठे करीषिणीः.
बिभ्रतीः सोम्यं मध्वनमीवा उपेतन.. (३)
हे गायो! मेरी इस गोशाला में तुम पुत्र, पौत्र आदि संतान से युक्त तथा चोर, बाघ आदि
के भय से रहित हो कर निवास करो. गोबर देने वाली तथा रोग रहित और अमृत के समान
दूध धारण करने वाली तुम मुझे प्राप्त होओ. (३)
इहैव गाव एतनेहो शकेव पुष्यत.
इहैवोत प्र जायध्वं मयि संज्ञानमस्तु वः.. (४)
हे गायो! तुम मेरी गोशाला में आओ. मक्खी जिस प्रकार संतान वृद्धि करती हुई, क्षण
भर में अगणित हो जाती है, उसी प्रकार तुम भी अधिक संतान वाली बनो. तुम इसी गोशाला
में पुत्रपौत्रों को जन्म दो और मुझ साधक के प्रति प्रेम रखो. (४)
शिवो वो गोष्ठो भवतु शारिशाकेव पुष्यत.
इहैवोत प्र जायध्वं मया वः सं सृजामसि.. (५)
हे गायो! तुम्हारे रहने का स्थान सुखमय हो. तुम क्षण में हजारों के रूप में बढ़ने वाले
शारिशाक जीव के समान मेरी पशुशाला में ही समृद्ध बनो. तुम यहीं संतान उत्पन्न करो. मैं
तुम्हें अपने से युक्त करता हूं. (५)
मया गावो गोपतिना सचध्वमयं वो गोष्ठ इहं पोषयिष्णुः.
रायस्पोषेण बहुला भवन्तीर्जीवा जीवन्तीरुप वः सदेम.. (६)
हे गायो! तुम मुझ गोस्वामी की गोशाला में आओ. यह गोशाला तुम्हारा पोषण करने
वाली है. चारे रूपी धन के कारण अनगिनत होती हुई तुम चिरकाल तक मुझ चिरजीवी के
साथ रहो. (६)
सूक्त-१५ देवता—इंद्र, अग्नि
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