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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 120 of 1063

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Page 120

सूक्त-९ देवता—द्यावा, पृथ्‍वी, विश्‍वे देव
कर्शफस्य विशफस्य द्यौष्पिता पृथिवी माता.
यथाभिचक्र देवास्तथाप कृणुता पुनः.. (१)
जो नाखून और खुर वाले बाघ आदि पशु हैं, जो बिना खुर वाले सर्प आदि जंतु हैं तथा
जो फटे हुए खुर वाले गाय, बैल, भैंस आदि पशु हैं उन का पिता द्युलोक है और माता पृथ्‍वी
है. हे देवो! इन विघ्नकारी पशुओं और जीवजंतुओं को आप ने जिस प्रकार हमारे अभिमुख
किया है, उसी प्रकार इन्हें हम से अलग करो. (१)
अश्रेष्माणो अधारयन् तथा तन्मनुना कृतम्.
कृणोमि वध्रि विष्कन्धं मुष्काबर्हो गवामिव.. (२)
दूषित शरीर से रहित देवों ने अभिमत कार्य में आने वाले विघ्नों की शांति के लिए अरलू
वृक्ष से बने दंड को धारण किया है. मनुष्यों की सृष्टि करने वाले मनु ने भी यही किया था.
बैलों को जिस प्रकार प्रजनन में असमर्थ बनाया जाता है, उसी प्रकार मैं सूखे चमड़े की रस्सी
से विघ्नों को निष्क्रिय कर रहा हूं. (२)
पिशङ्गे सूत्रे खगलं तदा बध्नन्ति वेधसः.
श्रवस्युं शुष्मं काबवं वध्रिं कृण्वन्तु बन्धुरः.. (३)
पीले रंग के धागे जिस प्रकार कवच को धारण करते हैं, उसी प्रकार साधक अरलू मणि
को अर्थात् अरलू वृक्ष से बने डंडे को धारण करते हैं. हमारे द्वारा धारण की हुई अरलू मणि
श्रवस्यु, शोधक और कबरे रंग के क्रूर प्राणियों से संबंधित विघ्नों को समाप्त करे. (३)
येना श्रवस्यवश्चरथ देवा इवासुरमायया.
शुनां कपिरिव दष्णो बन्धुरा काबवस्य च.. (४)
हे शत्रुओं को जीत कर यश की इच्छा करने वाले मनुष्यो! जिस प्रकार देवगण असुरों
की माया से मोहित थे, उसी प्रकार तुम शत्रुओं द्वारा डाले गए विघ्नों से मोहित हो. जिस
प्रकार बंदर कुत्तों को भगा देता है, उसी प्रकार तुम्हारे द्वारा धारण किया हुआ खड्ग विघ्नों
को दूर भगा दे. (४)
दृष्ट्यै हि त्वा भत्सयामि दूषयिष्यामि काबवम्.
उदाशवो रथा इव शपथैभिः सरिष्यथ.. (५)
हे मणि! मैं शत्रुओं द्वारा डाले गए विघ्नों को समाप्त करने के लिए तुझे धारण करता हूं.
इसी प्रकार मैं काबव नाम के विघ्न को दूर करता हूं. हे मनुष्यो! तुम दौड़ने के लिए विस्तृत
घोड़ों वाले रथों के समान शत्रुओं द्वारा उत्पन्न विघ्नों से रहित हो कर अपने कार्यों में लगो.
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