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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

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के द्वारा कुरेदती हुई इस का उद्धार करे. (१६)
सूक्त-१३७ देवता—अलक्ष्मी नाशन
यद्ध प्राचीरजगन्तोरो मण्डूरधाणिकी:.
हता इन्द्रस्य शत्रवः सर्वे बुद्बुदयाशवः.. (१)
जब मंडूधाणकी प्राची दिशा हृदय प्रदेश को प्राप्त हुई, तब इंद्र के सभी शत्रु नष्ट हो गए.
(१)
कपुन्नरः कपृथमुद दधातन चोदयत खुदत वाजसातये.
निष्टिग्र्यः पुत्रमा च्यावयोतय इन्द्रं सबाध इह सोमपीतये.. (२)
हे कर्मशील मनुष्यो! तुम सुखद इंद्र को हृदय में ग्रहण करो, तुम अन्न प्राप्ति के लिए
प्रेरणा करो. तुम अपनी रक्षा के लिए पुत्र को उत्पन्न करो तथा सोमरस पीने के लिए इंद्र का
आह्वान करो. (२)
दधिक्राव्णो अकारिषं जिष्णोरश्वस्य वाजिनः.
सुरभि नो मुखा करत् प्र ण आयूंषि तारिषत्.. (३)
इंद्र की सवारी के लिए मैं वेगवान अर्थात् तेज दौड़ने वाले घोड़े का पूजन कर चुका हूं.
वे इंद्र हमें सुरभि अर्थात् गाय का स्वामी बनाएं तथा हमें श्रेष्ठ बनाते हुए हमारा जीवन उत्तम
बनाएं. (३)
सुतासो मधुमत्तमाः सोमा इन्द्राय मन्दिनः.
पवित्रवन्तो अक्षरन् देवान् गच्छन्तु वो मदाः.. (४)
हर्ष प्रदान करने वाला सोमरस इंद्र के लिए तैयार किया जा चुका है. सोमरस छन्ने
अर्थात् छानने के लिए प्रयोग किए गए कपड़े से टपक रहा है. हे सोम! तुम्हारी शक्ति
देवताओं को हर्षित करे. (४)
इन्दुरिन्द्राय पवत इति देवासो अब्रुवन्.
वाचस्पतिर्मखस्यते विश्वस्येशान ओजसा.. (५)
इंद्र के लिए सोमरस का शोधन किया जा चुका है. संसार के स्वामी वाचस्पति अपने
ओज से प्रशंसित होते हैं. (५)
सहस्रधारः पवते समुद्रो वाचमीङ्खयः.
सोमः पती रयीणां सखेन्द्रस्य दिवेदिवे.. (६)
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