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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

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हे अंगिरागोत्रीय ऋषियो! आदित्य, वसु और रुद्र ये सभी तुम पर कृपा करते हैं. तुम
इस धन को ग्रहण करो. यह धन विशाल, बृहत, व्यापक तथा प्रभुता से संपन्न है. (९)
देवा ददत्वासुरं तद् वो अस्तु सुचेतनम्.
युष्मां अस्तु दिवेदिवे प्रत्येव गृभायत.. (१०)
देवता तुझे प्राण, शक्ति एवं चेतना प्रदान करते हुए प्रत्येक अवसर पर प्राप्त होते हैं.
(१०)
त्वमिन्द्र शर्मरिणा हव्यं पारावतेभ्यः.
विप्राय स्तुवते वसुवनिं दुरश्रवसे वह.. (११)
हे इंद्र! तुम इहलोक और परलोक दोनों को पार करने वालों के लिए हवि वहन करो.
जिस स्तोता ब्राह्मण को अन्न प्राप्त करना कठिन है, उसे तुम बल प्रदान करो. (११)
त्वमिन्द्र कपोताय छिन्नपक्षाय वज्चते.
श्यामाकं पक्वं पीलु च वारस्मा अकृणोर्बहुः.. (१२)
हे इंद्र! पंख कटे हुए कबूतर के लिए तुम पके हुए पीलु, अखरोट तथा अधिक मात्रा में
जल प्रदान करो. (१२)
अरंगरो वावदीति त्रेधा बद्धो वरत्रया. इरामह प्रशंसत्यनिरामप सेधति..
(१३)
चमड़े की रस्सी से बंधा हुआ रहट बारबार शब्द करता हुआ ऐसे स्थान को सींचता है,
जहां फसलें हैं. (१३)
सूक्त-१३६
यदस्या अंहुभेद्याः कृधु स्थूलमुपातसत्.
मुष्काविदस्या एजतो गोशफे शकुलाविव.. (१)
पाप का विनाश करने वाली ओषधि को क्रोध हो गया है. इस के सूखे हुए शकुल गाय
के खुर के गड्ढे में भरे पानी में कांपते हैं. (१)
यथा स्थूलेन पससाणौ मुष्का उपावधीत्.
विष्वञ्चा वस्या वर्धतः सिकतास्वेव गर्दभौ.. (२)
जब स्थूल पसस् के द्वारा मनुष्यों में अणु का प्रहार किया गया, तब धूल में लोटने वाले
गधों के समान आच्छादनी अर्थात् छप्पर में मुश्क बढ़ते हैं. (२)
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