अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 1043 of 1063
Read in contextदेवों के द्वारा नमस्कार के योग्य तथा महिमाशाली हो. (१४)
सूक्त-१२९ देवता—
एता अश्वा आ प्लवन्ते.. (१)
यह घोड़ी अच्छी तरह उछलती है. (१)
प्रतीपं प्राति सुत्वनम्.. (२)
सुवा प्रतीप को संपन्न करता है. (२)
तासामेका हरिक्निका.. (३)
उन में एक हरिक्निका है. (३)
हरिक्निके किमिच्छसि.. (४)
हे हरिक्निका! तेरी क्या इच्छा है? (४)
साधुं पुत्रं हिरण्ययम्.. (५)
हे पुत्र! साधु को स्वर्ण दो. (५)
क्वाहतं परास्यः.. (६)
अवाहत अर्थात् घायल हुआ परास्य कहां है? (६)
यत्रामूस्तिस्रः शिंशपाः.. (७)
इस स्थान पर तीन शिंशिपा वृक्ष हैं. (७)
परि त्रयः.. (८)
सभी ओर तीन हैं. (८)
पृदाकवः.. (९)
बहुत से पृदाकू हैं. (९)
शृङ्गं धमन्त आसते.. (१०)
वे सींगों को नष्ट कर के बैठे हैं. (१०)
ebook converter DEMO Watermarks*