अनुरागसागर वाणी

अनुरागसागर वाणी
Anuragsagar Vani
by स्वामी मधु परमहंस जी
Source: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (origin)
Devanagarihipublished144 pages
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अनुरागसागर वाणी
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ब्रह्मा ने कहा
ब्रह्मा कहे कौन विधि जाऊँ ।
पिता दरस अजहूँ नहीं पाऊँ ॥
गायत्री ने कहा
गायत्री कह दरस न पैहो ।
बेगि चलहु नहीं तो पछतैहो ॥
ब्रह्मा ने कहा
ब्रह्मा कहै देहु तुम साखी । परस्यो सीस देख मैं आँखी ॥
ऐसे कहो मातु समुझायी । तो तुम्हरे संग हम चलि जायी ॥
गायत्री ने कहा
कह गायत्री सुन श्रुत धारी । हम नहीं मिथ्या बचन उचारी ॥
जो मम स्वारथ पुरवहु भाई । तो हम मिथ्या कहब बनायी ॥
ब्रह्मा ने कहा
कह ब्रह्मा नहीं लखी कहानी ।
कहौ बुझाय प्रगट की बानी ॥
गायत्री ने कहा
कह गायत्री देहु रति मोहि ।
तो कह झूठ जिताऊँ तोहि ॥
सुन ब्रह्मा चित करे विचारा । अब का यत्न करहुँ इहि बारा ॥
ब्रह्मा ने सुनकर विचार किया कि अब क्या करूँ !
जो विमुख या कह करें, अब तो नहीं बनआवई ।