श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)
Srimad Ananda Ramayana Hindi
by महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात
Source: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (origin)
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Read in context७७४ | आनन्दरामायण | [ सर्गः ५
द्वादश्यां घटिकायां सोऽहं वैकुण्ठमाश्रये। ततो विधिं कुशः प्राह नलाद्या यदि मां द्विजे ॥६०॥
दास्यंति करभारं मे तर्हि तिष्ठतु छत्र ते। मदाज्ञां पालयंत्वेते तव नास्पात्सुरक्षिताः ॥६१॥
छत्रहीनाः सुखं त्वद्य वसन्तु हस्तिनापुरे। तद्वाक्यं स विधिः श्रुत्वा पुन प्राह कुशं प्रति ॥६२॥
छत्रमाज्ञापयस्यैतांस्तवज्ञावशवर्तिनः। दास्यंति करभारं त्वां मम वाक्यं हि पालय ॥६३॥
तथेति स कुशः प्राह विधिं किंचिस्मिताननः। अथ ते सोमवंशस्था नृपाः सर्वे विधिं तदा ॥६४॥
प्रोचुर्वयं त्वया स्त्रीभिर्यास्यामो दिवमद्य वै। अजमीढोऽद्य नृपनिर्भवत्वत्र गजाव्हये ॥६५॥
तथेति तान् विधिश्चोक्त्वा सभायां समुपविशत्।
अथ नृपाऽजमीढाय ब्राह्मणैरभिषिच्य च। गजाव्हये तं राजानं चकार राघवाज्ञया ॥६६॥
इति श्रीमत्कोटिरामचरितान्तर्गते श्रीमदानन्दरामायणे वाल्मीकीये पूर्णकाण्डे
सोमसूर्यवंशजयो मंत्रीकरणं नाम चतुर्थः सर्गः ॥ ४ ॥
पञ्चमः सर्गः
(रामका मित्रों तथा राजाओंको विदा करना)
श्रीरामचन्द्र उवाच
अथ रामं सुषेणश्च सुग्रीवश्च विभीषणः। वानराः प्रार्थयामासुर्वयं राम त्वया दिवम् ॥ १ ॥
यास्यामो नात्र जीवामस्त्वया राम विना भुवि। ददस्वाज्ञां त्वया गंतुं तथाह राघवोऽपि सः ॥ २ ॥
विभीषण त्वया स्थेयं लंकायां मम वाक्यतः। प्रचरिष्यति यावन्मे रामनामावनीतले ॥ ३ ॥
त्वं गच्छाद्यैव मे वाक्यात्तथेति स विभीषणः। नत्वा रामं ययौ लंकां राघवेणातिमानितः ॥ ४ ॥
ततः प्राह जांबवंतं राघवः पुरतः स्थितम्। हे जाम्बवंस्त्वया स्थेयं यावद्भूभ्यां कथामम ॥ ५ ॥
महीने इस संसारमें रहा ॥ ५७ ॥ ५८ ॥ थोड़ी-सी आयु शेष बची थी, सा भी कल पूरी हो जायगी ॥ ५९ ॥ ठीक बारह घड़ी बाद मैं वैकुण्ठधामके लिए चल दूँगा। तदनन्तर कुशने ब्रह्माजीसे कहा कि यदि नल आदि राजे मुझे करभार दें और मेरी आज्ञानुसार चलें तो मैं आपकी आज्ञासे इनको हर तरहसे सुरक्षित रखूँगा। इनको छत्र धारण करनेका अधिकार नहीं रहेगा। अर्थात् छत्रविहीन होकर ये लोग आनन्दके साथ रह सकेंगे। कुशकी बात सुनकर ब्रह्माने कहा कि आप इन्हे छत्र धारण करनेका आज्ञा दे दीजिए। हाँ, ये सदैव आपकी आज्ञाका पालन करते हुए करभार देते रहेंगे ॥ ६०-६४ ॥ कुशने ब्रह्माकी बात स्वीकार कर ली। इसके अनन्तर उन सोमवंशी राजाओंने ब्रह्मासे कहा कि हमलोग अपनी स्त्रियें लिये हुए आपके साथ स्वर्गको चले चलेंगे। अब इस हस्तिनापुरका राजा यह अजमीढ़ बनेगा ॥ ६५ ॥ ब्रह्माने भी उनकी बात स्वीकार कर ली और सभामें बैठ गये। इसके बाद रामकी आज्ञासे ब्रह्माने ब्राह्मणों द्वारा अजमीढ़का राज्या-भिषेक कराके हस्तिनापुरीका राजा बना दिया ॥ ६६ ॥ इति श्रीमत्कोटिरामचरितान्तर्गते श्रीमदानन्दरामायणे वाल्मीकीये पं० रामतेजपाण्डेयकृत'ज्योत्स्ना'भाषाटीकासहित पूर्णकाण्ड चतुर्थः सर्गः ॥ ४ ॥
श्रीरामदासने कहा-इसके बाद सुषेण, सुग्रीव, विभीषण तथा अन्यान्य वानरोंने भगवान्से प्रार्थना की- हे राम ! हमलोग भी आपके साथ स्वर्गको चलगें। आपके बिना हमारा इस पृथ्वीपर जीवित रहना कठिन है। कृपया हमें भी अपने साथ चलनेकी आज्ञा दीजिए। यह सुनकर रामने कहा-हे विभीषण ! तुम मेरे कहनेसे तबतक लंकामें ही रहो, जबतक संसारमें मेरे नामका प्रचार होता रहे। तुम आज ही लंका चले जाओ। विभीषणने भी भगवान्की बात मान ली और प्रणाम करके लङ्काको प्रस्थान कर दिया। चलते समय भगवान्ने विभीषणका बहुत सम्मान किया ॥ १-४ ॥ इसके अनन्तर जाम्बवान्से बोले-हे जाम्बवान् ! जबतक इस संसारमें मेरी कथा प्रचलित रहे, तब तक तुम इसी लोकमें रहो। द्वापरके अन्तमें फिर तुम हमारा दर्शन