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श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

by महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात

Source: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (origin)

DevanagariHindipublished811 pages

Page 783 of 811

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Page 783

७६६ आनन्दरामायणं [ सर्गः ३

तत्पृष्ठे भरतश्चापि शत्रुघ्नश्च ततो ययौ । ततः कुशो लवश्चाथ ततः सोऽप्यंगदो ययौ ॥७८॥
ययौ ततश्चित्रकेतुः पुष्करश्च ततो ययौ । ततस्तक्षः सुबाहुश्च यूपकेतुस्ततो ययौ ॥७९॥
ततः सीता ययौ शीघ्रमुर्मिला च ततः परम् । माण्डवी श्रुतकीर्तिश्च स्नुषाः सर्वाः क्रमागयुः ॥८०॥
ततस्ते मन्त्रिणः सर्वे शिबिकारूढविक्रमा ययुः । ततो ययुर्वानराश्च कोटिशः पर्वतोपमाः ॥८१॥
ततो ययुर्नृपाः सर्वे कोटिशो वारगस्थिताः । ततो नृपाणां सैन्यानि यपुर्वाजिश्चितानि हि ॥८२॥
ययुस्ततस्ते यंत्राणां शकटाः कोटिशो वराः । शतघ्नीखड्गचर्मादिपूरिताः शकटास्तदा ॥८३॥
ततो वारणमुख्यश्च नववाद्यसमन्वितः । ततश्चोष्ट्राः सुवर्णानां ततः पृष्ठे खरादयः ॥८४॥
एवं रामः शनैर्मार्गं चामराद्यैः सुवीजितः । सीतया चालल्यैश्च वीक्षितश्च मुहुर्मुहुः ॥८५॥
ययौ शनैः शनैः श्रीमान्स्तुतो मागधवंदिभिः । पश्यन्नृत्यान्यप्सरसां शृण्वन् गान्यान्यथ ॥८६॥
सेनानिवेशस्थानानां यात्राकांडे यथोदिता मया पूर्वं सुरचना तद्वदासीत्पुनस्त्विह । ८७॥

इति श्रीशतकोटिरामचरितान्तर्गते श्रीमदानन्दरामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये पूर्णकांडे
रामदासविष्णुसंवादे रामप्रस्थानं नाम द्वितीयः सर्गः ॥ २ ॥


तृतीयः सर्गः

( रामका सोमवंशियोंके साथ युद्ध )

श्रीरामदास उवाच

अथ रामः शनैर्मार्गे नानादेशान्विलंघ्य च एकादशदिनैः प्राप सेनया तद्वयाह्वयम् ॥ १ ॥
राममागमनंज्ञात्वा सुषेणो वेगवत्तरः । प्रत्युद्ययौ स्वकत्रिभिविंशल्लक्षसमन्वितैः । २ ॥
नत्वा रामं च सीतां च सर्वं वृत्तं न्यवेदयत् राम राम महाबाहो प्रतापात्तव वै मया ॥ ३ ॥


शत्रुघ्न, कुश, अङ्गद, चित्रकेतु, पुष्कर, तक्ष और उनके पच्छे राजपुत्र सुबाहु चल जा रहे थे । राजपुत्रोंकी टोलीके पीछे सीता, उर्मिला, माण्डवी, श्रुतकीर्ति और उनके पीछे उनकी पतोहुएं चली जा रही थीं उनके पीछे समक्त मन्त्रिगण पालकियोंपर बैठ चले जा रहे थे । उनके भी पीछे पर्वतके समान बड़े-बड़े आकारवाले वानर और उनके पीछे विविध प्रकारकी सवारियोंपर सवार सब राज चले जा रहे थे । उनके पीछे उन राजाओंकी सेनाये घोड़ोंपर सवार होकर चलीं जा रही थी । उनके पीछे कितनी ही बैलग़ाड़ियोंपर रखे हुए तोप आदि यन्त्र चल जा रहे थे ॥ ७७-८३ ॥ उनके पीछे मुख्य-मुख्य हाथी अनेक प्रकारके दाज लदे हुए चले जा रहें थे और उनके भी पीछे एक बहुत बड़ा हाथी चल रहा था जिसपर राष्ट्रकी पताका सुशोभित हो रही थी उनके पीछे सुवर्णसे लदे हुए ऊँट और उनके पीछे और-और सामान लादे हुए गधे तथा खच्चर आदि चल रहे थे ॥ ८४ ॥ इस तरह राम धीरे-धीरे चले जा रहे थे । उनके ऊपर चमर व्यजन् आदि चल रहे थे और सीताजी अपनी सर्वाङ्गसे डोलोंपर बार बार रामको निहार रही थीं । ८५ ॥ मागध-वन्दीजन आदि विविध प्रकारकी स्तुतिये कर रहे थे और कितने ही अप्सराओंके नृत्य-गान हो रहे थे ॥ ८६ ॥ रामचन्द्रजीके पड़ाव ठीक उसी तरह इस समय भी थे, जैसे कि पीछे यात्राकाण्डमें बतलाये जा चुके हैं ॥ ८७ ॥

इति श्रीशतकोटिरामचरितान्तर्गते श्रीमदानन्दरामायणे पूर्णकाण्डे द्वितीय सर्गः ॥ २

इस तरह धीरे-धीरे चलते हुए राम अपनी सेनाके साथ अनेक देशोंको लांघते हुए ग्यारह दिनमे हस्तिनापुर पहुंचे । १ ॥ रामके पहुंचनेका समाचार पाते ही सुषेण बीस लाख सैनिकोको लेकर आ पहुंचे ॥ २ ॥ रामके समक्ष पहुंचकर उसने सीता रामको प्रणाम किया और कहन लगा—हे महाबाहो राम ! आपके