श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)
Srimad Ananda Ramayana Hindi
by महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात
Source: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (origin)
Page 647 of 811
Read in contextसर्गः ६ ] मनोहरकाण्डम् ६३१
ग्राह्या मरिचमानेन नवार्थं नवभिस्त्विदम् । तोषदं रामचन्द्रस्य भक्त्या कार्यं सदा नरैः ॥१३॥
लघु नवान्नं वक्ष्यामि नैवेद्यार्थं निरंतरम् । कुडवा नव गोक्षीरं तंदुलाः कुडवस्य च ॥१४॥
चतुर्थांशमिता ग्राह्याः कुडवाष्टांशसंमिताः । ग्राह्या विनुषमुद्गाश्च कुडवार्धं सिता स्मृता ॥१५॥
घृतं मुद्रसमं ग्राह्य तावन्मानं मधु स्मृतम् । तावन्मानं श्रीफलं च मरिचं टंकसंमितम् ॥ १६॥
टंकार्धा जातिपत्रीच नवान्नं लघु कीर्तितम् । कुडवोऽर्कटकैर्मितस्टंको माषचतुष्टयम् ॥ १७॥
लघु नवान्नमेतच्च राघवाय निवेदयेत् । निरंतरं हि पूजायां राघवस्यातिहर्षदम् ॥१८॥
पनसम्बूकपिन्याश बीजपूरं च दाडिमम् । खर्जूरी नारिकेलं च कदलीफलमेव च ॥१९॥
पनसं चेति रामाय फलानि नव सर्वदा । एतान्यतिप्रियाण्यत्र पूजायां ह्यभिनिवेदयेत् ॥२०॥
कूष्मांडकं च जंबीरं नारंगं स्निग्धमञ्जकम् । जातीफलं मातुलुंगं तथा द्राक्षाफलं शुभम् ॥२१॥
उर्वारुकं तथा धात्रीफलं चैतानि वै नव । फलानि रामपूजायामुक्तानि मुनिभिः सदा ॥२२॥
नरोपचारैस्तांबूलं राघवाय निवेदयेत् । नागवल्लीः कत्तुकं च खदिरः संघ एव च ॥२३॥
जातीपत्री लवणं च जातीफलवरागके । एला चेति नवविधम्नांबूलः कीर्त्यते बुधैः ॥२४॥
नवरानोपचारॉश्च राघवाय निवेदयेत् । छत्रं सिंहासनं यान चामरं व्यजनं तथा ॥२५॥
पानतांबूलयंत्रं च पात्रं निष्ठीवनस्य च । वस्त्रकोशश्चेति राजोपचारा नव स्मृताः ॥२६॥
नवाय भोग्यवस्तूनि राघवाय निवेदयेत् । चंदनं पुष्पमालां च द्रव्यं परिमलं तथा ॥२७॥
अवतंसः फलं चापि सुगन्धं तैलमुत्तमम् । ताम्बूलं कस्तूरी चापि तथा रक्ताक्षताः शुभाः ॥२८॥
एतानि भोग्यवस्तूनि राघवाय निवेदयेत् । नवोपचाराः शय्याऽपि राघवाय समर्पयेत् ॥२९॥
पर्यङ्कस्तूलिका रम्या वितानं चोषवर्हणम् । आदर्शो दीपिको तोयपात्रं प्रावरणं शुभम् ॥३०॥
व्यजनञ्चेति शय्यायाश्चोपचारा नव स्मृताः । नव वस्त्राणि रामाय देयान्यतिमहान्ति च ॥३१॥
पीतांबरमुत्तरीय चोष्णीषं कञ्चुकं तथा । उर्णापोर्ध्वस्थितं दिव्यं तथा च कटिबंधनम् ॥३२॥
॥ १३॥ अब मैं अर्पण करने योग्य लघु नवान्न बतलाता हूँ— नौ कुडव गायका दूध, एक कुडवका चतुर्थांश चावल, कुडवका अष्टमांश बिना छिलकेकी धुली मूंग, आधा कुडव चीनी, मूंगके बराबर ही घी, उतना ही मधु, उतना ही श्रीफल, एक टंक काली मिर्च, आधा टंक जातिपत्री, ये लघु नवान्न कहलाते हैं। बारह टंकका एक कुडव होता है और चार माशेके बराबर एक टंक होता है। यह लघु नवान्न रामचन्द्रजीको अर्पण करना चाहिए। यदि निरन्तर यह नवान्न रामचन्द्रजीको अर्पण किया जाय तो भगवान् अतिशय प्रसन्न होते हैं ॥ १४-१८॥ आम, जामुन, केंथा, बीजपूर, अनार, खजूर नारियल, केला और कटहल ये नौ फल रामचन्द्रजीको अतिशय प्रिय हैं। पूजामें इन्हें भी अर्पण करना चाहिये। कूष्मंडा, नींबु, नारङ्गी, कसेरू, जायफल, बिजौरा, अंगूर ककड़ी तथा आँवला ये नौ फल रामकी पूजामें आना आवश्यक है ॥ १९-२२॥ उसी तरह नौ उपचारोंके साथ ताम्बूल भी रामचन्द्रजीको अर्पण करना चाहिये। ताम्बूलके नौ उपचार ये हैं-पान, सुपारी, खैर, चूना, जावित्री, जायफल, कपूर, केसर और इलायची। नौ राजोपचार भी रामचन्द्रजीको अर्पण करने चाहिए। जैसे-छत्र, सिंहासन, रथ, चमर, पंखा, गिलास, पानदान, मोगासदान और कपड़ेकी पिटारी, ये ही राजाओंके नौ उपचार बतलाये गये हैं। उसी प्रकार नौ भोग्य वस्तु भी रामचन्द्रजीको अर्पण करना चाहिए। ये वस्तुयें इस प्रकार जाननी चाहिये-चन्दन, फूलोंकी मालाएँ, इत्र आदि सुगन्धित द्रव्य, तरह-तरहके फल, उत्तम सुगन्धित तेल ताम्बूल, कस्तूरी और लाल अक्षत, इन भोग्य वस्तुओंको रामचन्द्रजीको अर्पण करे। इसी तरह नौ उपचारयुक्त शय्या भी देनी चाहिये ॥ २३-२९॥ पलङ्ग, गद्दा, बढ़िया चाँदनी, तकिया, शीशा, दीपक, जलपात्र, चदरा और व्यजन, ये शय्याके नौ उपचार हैं। इसी तरह अत्यन्त सुन्दर नौ कपड़े भी रामचन्द्रजीको अर्पण करे। ३० ॥ ३१ ॥ जैसे-पीताम्बर, उपरना, पगड़ी, कंचुकी, परदाके ऊपर बांधनेवाला