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श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

by महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात

Source: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (origin)

DevanagariHindipublished811 pages

Page 569 of 811

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Page 569

श्रीसीताप्तये नमः

श्रीवाल्मीकिमहामुनिकृतशतकोटिरामचरितान्तर्गतं-

आनन्दरामायणम्

'ज्योत्स्ना'ऽभिधया भाषाटीकयाऽऽटीकितम्


मनोहरकाण्डम्

प्रथमः सर्गः

( लघुरामायण )

विष्णुदास उवाच

गुरो ते प्रष्टुमिच्छामि यत्तत्त्वं वक्तुमर्हसि । वेदवाक्यं पुरा प्रोक्तं नारदेन महात्मना ॥ १ ॥
रामायणं वाल्मीकये संक्षेपच्चेति मेऽकथि । तावदेवार्थमादाय श्लोकरूपं वदस्व माम् ॥ २ ॥

श्रीरामदास उवाच

सम्यक् पृष्टं त्वया वत्स सावधानमनाः शृणु यत्पृष्टं च त्वया सर्वं तद्वदामि तवाग्रतः ॥ ३ ॥
नारदाद्वेदवाक्यञ्च यथा वाल्मीकिना श्रुतम् । तावदेवार्थमादाय तेन वाल्मीकिना पुरा ॥ ४ ॥
शतश्लोकमितं रामचरितं पापनाशनम् । शतकोटिमितार्थां स्वकवितानां मनोरमम् ॥ ५ ।
आदावेवैकमेवास्ति तत्तवाग्रे वदाम्यहम् । शतकोटिमित्ते रम्यं लघुरामायणाह्वयम् ॥ ६ ।
कूजन्तं राम रामेति मधुरं मधुराक्षरम् । आरुह्य कविताशाखां वन्दे वाल्मीकिकोकिलम् ॥ ७ ॥
वाल्मीकेर्मुनिसिंहस्य कवितावनचारिणः । शृण्वन्रामकथानादं को न याति परां गतिम् ॥ ८ ॥


विष्णुदासने कहा—हे गुरो ! मै आपसे यह पूछना चाहता हूँ कि वेदवाक्योंका सारांश लेकर संक्षेपमें नारदजीने महर्षि वाल्मीकिसे कौन सी रामायण कही थी ? उसी सार वस्तुको श्लोकरूपमें बनाकर वाल्मीकिने आपको सुनाया था, वह हमसे भी कहिए । १ ॥ २ ॥ श्रीरामदासने कहा-हे वत्स ! तुमने अच्छा प्रश्न किया है अब सावधान होकर सुनो तुमने जो प्रश्न किया है उसका उत्तर तुम्हारे आगे कह रहा हूँ ॥ ३ ॥ जब वाल्मीकिजीने नारदके मुखसे वेदवाक्योंसे संकलित रामचरित्र सुन लिया तब उसी अर्थको लेकर उन्होंने सौ श्लोकोंमें पापनाशक लघुरामायणकी रचना की और अपने रामायणके आदिमें उन्होंने उसी लघुरामायणको स्थान दिया। वही सौ श्लोकोंवाला लघुरामायण आज मैं तुम्हारे आगे कह रहा हूँ ॥ ४-६ ॥ कवितारूपिणी शाखापर बैठकर मीठे मीठे अक्षरोंमें रामनामका गान करनेवाले वाल्मीकिरूपी कोकिलको मैं वन्दना करता हूँ ॥ ७ ॥ कवितारूपी वनमें विहार करनेवाले तथा मुनियोंमें सिंह-सदृश वाल्मीकिकी रामकथारूपिणी गर्जनाको सुनकर संसारमें कौन ऐसा प्राणी है, जो उत्तम गतिको न