श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)
Srimad Ananda Ramayana Hindi
by महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात
Source: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (origin)
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राज्यकाण्डम् ( पूर्वार्द्धम् )
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ताः कृतार्थाः स्ववश्यातो जातास्तु गोपिकाः । तांबूलोंच्छिष्टरसं दासी रामस्य भक्तितः ॥७३।
पीत्वा यस्यैव वरतो ब्रजे सा राधिकाऽभूत् । अतो मे राघवो धन्यो यस्यैका दयिताऽत्र हि ॥७४॥
कृष्णोपासक उवाच
मम कृष्णेन पत्न्यश्च सहस्राणि हि षोडश साष्टोत्तरशतान्यत्रोद्वाहिताश्च विधानतः ॥७५॥
रामोपासक उवाच
मम रामस्वरूपेण सर्वास्ता मोहिताः स्त्रियः । मातृवन्मोहितास्तेन वीरेण पुरुषार्थिना ॥७६॥
कृष्णेन रतिकामेन मोहिता गोपिकाः स्त्रियः ।
* कृष्णोपासक उवाच
गजेन्द्रो मम कृष्णेन लीलया निहतो द्विज ॥७७॥
रामोपासक उवाच
मम रामेण नागेन्द्ररिपुरष्टापदो हतः ।
कृष्णोपासक उवाच
मम कृष्णप्रतापेन यमुना खंडिता त्वभूत् । ७८॥
रामोपासक उवाच
मम रामप्रतापेन खंडिता जाह्नवी त्वभूत् ।
कृष्णोपासक उवाच
मम कृष्णेन वै स्वर्गादानीतः सुरपादपः ॥७९॥
रामोपासक उवाच
मम रामेण स्वर्गादानीतौ सुरपादपौ ।
कृष्णोपासक उवाच
मम कृष्णेन स्वगुरोर्मृताश्चापि सुता मृताः ॥८०।
सुजीविताः समानीताः सप्त ताभ्यां निवेदिताः ।
ब्रजकी समस्त गोपियोंको मोहित कर लिया और राधानामवाली उस सुन्दरीको मुग्ध कर लिया था, जो अपने असाधारण सौन्दर्यसे कामदेवको भी लजाती थी ॥७१॥ रामोपासकने कहा-हमारे रामने अपने सौन्दर्य-से देवपत्नियोंको मोहित किया था। वे सब रात्रिके समय एकान्तमें रामके पास पहुँचीं। किन्तु उन्हें रामने अपनी माताके समान माना और वरदान देकर कृतार्थ किया। वे ही जन्मान्तरमें गोपिकायें हुईं। उस समय रामचन्द्रके मुखसे ताम्बूलके निकाले हुए पोयको पीनेवाली दासी दूसरे जन्ममें राधा हुई। इससे मेरे रामचन्द्र धन्य हैं । क्योंकि वे एकपत्नीव्रतधारी हैं ॥७२-७४॥ कृष्णोपासकने कहा—हमारे कृष्णचन्द्रजाने सोलह हजार एक सो आठ स्त्रियोंके साथ विधिवत् विवाह किया था ॥ ७५ ॥ रामोपासकने उत्तर दिया कि हमारे रामचन्द्रजीने अपनी सुन्दरतासे संसारकी समस्त नारियोंको मोह लिया था, किन्तु स्त्रीके भावसे नहीं—अपितु माताके भावसे; क्योंकि हमारे राम वीर और पुरुषार्थी थे ॥ ७६ ॥ कृष्णने गोपियों नारियोंपर मोहिनी डाली थी अपनी कामवासनाकी पूर्तिके लिए। कृष्णोपासकने कहा-हे द्विज ! हमारे कृष्णने खेल खेलमें कुवलयापीड हाथीको मार डाला था ॥ ७७ ॥ रामोपासक बोला—मेरे रामने अष्टापद नामक राक्षसको खेल-खेलमे मार डाला था। कृष्णोपासकने कहा—मेरे कृष्णने अपने प्रतापसे यमुनाकी धारा खण्डित कर दी थी ।। ७८ ॥ रामोपासकने कहा - मेरे रामके प्रतापसे गंगा खण्डित हो गयी थी। कृष्णोपासकने कहा—हमारे कृष्ण अपने पराक्रमसे कल्पवृक्ष ले आये ॥७९॥ रामोपासकने कहा—हमारे