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श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

by महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात

Source: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (origin)

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DevanagariHindipublished811 pages

Page 285 of 811

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Page 285

सर्गः ९ ] विलासकाण्डम् २६९

केसिंहेभपृषव्याघ्रनृगचित्रविचित्रितान् । पीतरक्तहरिच्छयामकृष्णरत्नमण्डितान् ॥४४॥
तत ऊर्ध्वं ददृशुस्ते पदकान्युज्ज्वलानि हि । शृङ्खलापमान्येव हेमजातान्यथानि च ॥४५॥
मद्वांचनशृङ्खलानि काञ्चनग्रथितानि च । नानाग्रन्थिविचित्राण्ये मुक्तेर्मण्डिततान्यपि ॥४६॥
नानामाणिक्ययुक्तानि दीप्तिमन्तपुत्तल विधि तत'ददृशुस्ते विख्यातं समानान्तरविचित्रितान् ॥४७॥
नवरत्नयुतान्दान्गगुच्छांस्तारानुश मुक्ताः । मुनिमाला रुक्मपत्र चम्पमाला विचित्रिताः । ४८।
पुष्पमालाः कांचनजाः मणिकारत्नमण्डिताः रुक्मगुच्छान्विता माला हेमपत्रिकातन्विताः ॥४९॥
प्रवालमणिमुक्तामिश्रिचित्रविचित्रिताः । चम्पकूप्रकलिकार मण्डिता हेममालिकाः ॥५०॥
कण्ठे मंगलसूत्रं च पेटिका रत्नभूषिता । कांचनानां सुवृत्तानां मणीनां विविधानि च ॥५१॥
गुच्छैः कण्ठभूषणानि मुक्तागुच्छोथतान्यपि ददृशुस्ते हि सीतायाः कण्ठे हेमन्तनेकशः ॥५२॥
रत्ननामट्टताम्येव ग्रीवाया भूषणान्यपि । प्रवालमणिशणिक्यग्रचित्ताम्युज्ज्वलानि च ॥५३॥
मुक्तागुच्छान् काञ्चगुच्छान् माणगुच्छैर्विचित्रितान् ।
प्रवालमणिगुच्छांश्च रत्नपुष्पविभूषितान् ॥५४॥
ततो ददृशुस्ते सर्वे थैथीलारुचकञ्चुकैम् । हेमन्तन्तुमयं चित्रो मुक्तामाणिक्यगुंफितम् ॥ ५५॥
आदर्शबिंबसंयुक्तो पुष्टताजिर्विराजितम् । मयूरशुकहंसैश्च लवगैस्तन्तुनिर्मितैः ॥५६॥
विचित्रां श्रमणभणौर्दो गलन्तों रुई नत्री । ततो ददृशुर्भूपत्योः केयूरे रत्नमण्डिते ॥५७॥
वज्रकंकणसादृश्ये हेममाणिक्यनिर्मिते । रत्नविचित्रित्राश्च भूजशोः पेटकाः शुभाः ॥५८॥
हेमतन्तुमवैर्लंबमानगुच्छैः सुमंडिताः प्रवालमणियुक्तानां नानागुच्छैर्युक्ता अपि ॥५९॥
तदधः करयोः सर्वे ददृशुर्भूषणानि ते । रत्नमाणिक्यमुक्ताभिविचित्री हेममम्बवौँ ॥६०॥
करचूडी दाभिमनी हेमपुष्पादिचित्रिती । काचकङ्कणघण्टाशी चन्द्रार्धार्था विधा ॥६१॥

व्याघ्र और मृग आदिके चित्र बने थे। पीले, लाल, हरे, नील और काले मणि स्थान-स्थानपर जड़े हुए थे ॥४२-४४॥ इसके ऊपर सामान देखा कि भांति-भांतिके आभूषण पड़े हैं। कहीं सोनकी जंजीरें हैं, कहीं काञ्चन काम बना है और कहीं लटकनयुक्त रत्नोंकी सजावट है ॥४४॥४६॥ कई तरहक मणियोंके आभूषण देदीप्यमान हो रहे हैं। नौ रत्नोंस जड़ा हुआ हार है। मोतियोंका माला है। सोनेकी जंजीर हैं। मणियमाला, नलुण एवं पत्का माला भी पड़ा हुआ है ॥४७॥४८॥ फूलोंका माला, कञ्चनकी माला, कञ्चन और मुक्ताओं मिश्रित माला, सुवर्णकम्पित मणियोंका माला, पल्लव तथा अन्यान्य मणियोंसे मिश्रित माल चंपाकी कलीके समान बने हुए सुवर्णकी माला, पेटिका मंगलसूत्र, रत्न-जटित पेटो, सुवर्ण तथा मूक्षा मणियोंके बने हुए गुच्छ और मोतियोंके गुच्छोंको उन्होंने सीताके गलेमें देखा । ४९-५२॥ ठीक कण्ठके समान ही सीताका अनेक आभूषण भी दख पड़ते थे। उनम भी प्रवाल और मणि माणिक्य आदि जड़े थे। मोतियोंके गुच्छे काँचके गुच्छे और रत्नाके गुच्छोंस वे रंग-बिरंगे मालूम होते थे। इसके अनन्तर लगान सीताजीका चोली देखा। वह भा सुवर्णके तारामे बनी, मुक्ता-मणि-माणिक आदिसे सजा और प्रकाश युक्तम था जिसम मयूर और तोतोंके चित्र बन थे, वृक्षोंस चित्रित एवं चंद्रबिन्दुओंसे भीगी तथा अत्यंत विस्ती हुई वह सोभा थी। इसके बाद सतारू रत्नमण्डित बाजूबन्दपर लोगोंकी दृष्टि पड़ी ॥५३-५७॥ यह भी विचित्र प्रकारके रत्नोंसे जटिल थी और उनकी आभा स भिन्न-विचित्र मालूम देती था। फिर जिसमें जरीके काम किये हुए थे मणिका उस कमर्पट्टिकापर लोगोंकी दृष्टि पडी ॥५८॥ उसमें भी सुवर्णके तारोंके बड़े-बड़े गुच्छे लटक रहेथ । जगह-जगहपर प्रवालमणि-मुक्ता आदिकोंके गुच्छे लटक इस रहे थे ॥५९॥ फिर दोनों हाथांम जो और आभूषण थे उन्हें लोगोंने देखा। वे भी रत्न-माणिक और मोती आदिसे चित्रित सुवर्णके बने थे ॥६०॥ हाथोंके दोनों कंकण सुवर्णके पुष्पसे सजे हुए