श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)
Srimad Ananda Ramayana Hindi
by महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात
Source: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (origin)
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Read in contextश्रीरामचन्द्रो विजयतेतराम्
श्रीवाल्मीकिमहामुनिकृतशतकोटिरामचरितान्तर्गतं
आनन्दरामायणम्
'ज्योत्स्ना'ऽऽह्वया भाषाटीकयाऽऽटीकितम्
यागकाण्डम्
प्रथमः सर्गः
(अश्वमेध यज्ञके लिए सामग्री एकत्र करनेका निर्देश)
श्रीरामदास उवाच
अथ रामः सभाध्ये एकदा गुरुमब्रवीत् । कुम्भोदरमुनेर्वाक्यात्तीर्थयात्रा मया कृता ॥ १ ॥
इदानीं तस्य वाक्येन वाजिमेधं करोम्यहम् । यज्ञोपकरणानि त्वं लक्ष्मणाय वदस्व हि ॥ २ ॥
सुमुहूर्ते शुभे लग्ने श्यामकर्णस्त्रिपुच्छकः । तुरङ्गो दिव्यवस्त्राद्यैर्भूषयित्वा विमुच्यताम् ॥ ३ ॥
पृथ्वीप्रदक्षिणार्थं हि तत्पृष्ठेऽयुतसंख्यया । सेनया सह शत्रुघ्नः सुमंत्रेण महाद्युतिः ॥ ४ ॥
तद्राघववचं श्रुत्वा वसिष्ठो मुनिसत्तमः । ज्योतिर्विद्भिःसहितो दृष्ट्वा सुमुहूर्तं शुभोदयम् ॥ ५ ॥
आज्ञापयत्स सौमित्रिं सभायां राजसन्निधौ । सौमित्रेऽद्यदिनात्सप्तमेऽह्नो मुहूर्त्तः सप्तमेऽहनि ॥ ६ ॥
दीक्षार्थं रामचन्द्रस्य वाजिमेधाख्यकर्मणि । रामतीर्थे यज्ञभूमिः शोधनीया हलादिभिः ॥ ७ ॥
सुवर्णनिर्मितैर्दिव्यैर्ब्राह्मणैः सह सत्वरम् । दशक्रोशमिताऽयोध्याबहिः सर्वत्र लक्ष्मण ॥ ८ ॥
समा कंकरहीना तु लिप्ता चन्दनजातिभिः । मण्डपश्च विधातव्यः सर्वदोषखण्डितः शुभः ॥ ९ ॥
श्रीरामदासने कहा इसके अनन्तर एक दिन सभामें रामचन्द्रजी गुरु वसिष्ठसे कहने लगे—हे गुरो ! कुम्भोदर ऋषिके कथनानुसार मैंने तीर्थयात्रा की । अब उन्हींकी बातसे मैं अश्वमेध यज्ञ भी करना चाहता हूँ । यज्ञकी जो-जो आवश्यक वस्तुएँ हों, कृपया आप लक्ष्मणको बतला दीजिए ॥ १ ॥ २ ॥ किसी अच्छे मुहूर्त और शुभ लग्नमें श्याम रङ्गवाले जिसके कान, पैर और पूँछ हों, ऐसे घोड़ेको सुन्दर वस्त्रों और आभूषणोंसे सुसज्जित करके पृथ्वीप्रदक्षिणाके लिए छोड़ा जाय ॥ ३ ॥ तदनन्तर उस यज्ञीय घोड़ेकी रक्षा करनेके लिए दस हजार सेनाके साथ सुमन्त्र और शत्रुघ्न प्रस्थान करें ॥ ४ ॥ रामचन्द्रजी की इन बातोंको सुनकर वसिष्ठजीने ज्योतिषियोंके साथ अच्छे लग्न तथा अच्छे नक्षत्रसे संयुक्त एक बढ़िया मुहूर्त देखा और सभामें ही रामचन्द्रजीके सामने लक्ष्मणजीसे बोले—हे लक्ष्मण ! रामचन्द्रके यज्ञकी दीक्षा लेनेका शुभ मुहूर्त आजसे ठीक सातवें दिन है ॥ ५ ॥ ६ ॥ सबसे पहला काम यह है कि इस अश्वमेध यज्ञके लिए रामतीर्थकी भूमि सुवर्णके बने हुए हलों द्वारा ब्राह्मणोंके साथ जोतकर शुद्ध की जाय । अयोध्याके चारों ओर दस कोस तककी जमीन पटवाकर बराबर कर दी जाय और ऐसी साफ की जाय कि उसमे कहीं कुछ भी कङ्कड़-पत्थर न रहने