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श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

by महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात

Source: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (origin)

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DevanagariHindipublished811 pages

Page 176 of 811

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Page 176

१६० आनन्दरामायणे [ सर्गः १३

युक्ता सं रञ्जयामास राजानं राघवं मुदा । एवं गिरीन्द्रजे प्रोक्तं रामराज्योत्तरोद्भवम् ॥२०८॥
चरितं रघुनाथस्य यथा पृष्टं त्वया मम । श्रवणात्सर्वपापघ्नं महामंगलकारकम् । २०९॥
सारकांडमिदं देवि ये शृण्वन्ति नरोत्तमाः ।
तेषां मनोरथाः सर्वे परिपूर्णा भवन्ति हि । २१० ॥
इति श्रीशतकोटिरामचरितांतर्गते श्रीमदानन्दरामायणे वाल्मीकीये सारकाण्डे
अगस्तिरामशिवपार्वतीसंवादे त्रयोदशः सर्गः । १० ॥

प्रथमसर्गे श्लोकाः ॥ १०९ ॥ द्वितीये ॥ ३१ ॥ तृतीये ॥ १६४ ॥ चतुर्थे १७० ॥ पंचमे ॥ १४० ।
षष्ठे ॥ १३० ॥ सप्तमे ॥ १६१ । अष्टमे ॥ १२५ ॥ नवमे ॥ ३१० । दशमे ॥ २७३ ॥ एकादशे
॥ २८८ । द्वादशे ॥ २०२ ॥ त्रयोदशे ॥ २१० ॥ एवं सारकाण्डस्य पूर्णश्लोकसंख्या ॥ २५५८ ।


॥ २०६ ॥ सीता प्रेमके अनुकूल बर्तावसे, नम्रतासे, लज्जासे, डरसे, पातिव्रत धर्मसे, मनोहरभावसे तथा पतिके मनोभावको जानकर उसके अनुसार व्यवहारसे राजा रामको प्रेमपूर्वक आनन्दित करने लगीं । हे गिरीन्द्रजे ! इस प्रकार मैंने तुमको रामके राज्यकालके बादका सब वृत्तान्त कह सुनाया, जैसा कि तुमने पूछा था । यह रामचरित्र श्रवणमात्रसे सब पापोंका नाशक तथा महामंगलकारी है ॥ २०७-२०९ ॥ हे देवि, जो लोग इस सारकांडको श्रद्धासे सुनते हैं, उन नरश्रेष्ठोंके सब मनोरथ पूर्ण होते हैं। इसमें तनिक भी सन्देह नहीं है ॥ २१० ॥ इति श्रीमच्छतकोटिरामचरितान्तर्गते श्रीमदानंदरामायणे वाल्मीकीये सारकांडे अगस्तिरामशिवपार्वतीसंवादे पं० रामतेजपाण्डेयकृत'ज्योत्स्ना'भाषाटीकायां त्रयोदशः सर्गः ॥ १३ ॥

इस सारकाण्डके पहिले सर्गमें १०९ श्लोक दूसरेमें ३१, तीसरेमें १६४, चौथेमें १७०, पाँचवेंमें १४०, छठवें १३०, सातवेंमें १६१, आठवेंमें १२५, नवेंमें ३१०, दसवेंमें २७३, ग्यारहवेंमें २८८, बारहवेंमें २०२ तथा तेरहवेंमें २१० श्लोक हैं । इस प्रकार इस सारकाण्डमें कुल २५५८ श्लोक हैं ।


* इति श्रीमदानन्दरामायणे सारकाण्डं समाप्तम् *

श्रीरामचन्द्रार्पणमस्तु