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श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

by महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात

Source: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (origin)

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DevanagariHindipublished811 pages

Page 17 of 811

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Page 17

श्रीसीतापतये नमः
श्रीवाल्मीकिमहामुनिकृतशतकोटिरामचरितान्तर्गतं

आनन्दरामायणम्

'ज्योत्स्ना'ह्वया भाषाटीकयाऽऽटीकितम्


सारकाण्डम्

प्रथमः सर्गः

(दशरथ-कौसल्याविवाह तथा ऋष्यशृङ्ग द्वारा पुत्रेष्टि यज्ञ)

श्रीवाल्मीकिरुवाच

वामे भूमिसुता पुरस्तु हनुमान् पृष्ठे सुमित्रासुतः
शत्रुघ्नो भरतश्च पार्श्वदलयोर्वाय्वादिकोणेषु च ।
सुग्रीवश्च विभीषणश्च युवराट् तारासुतो जाम्बवान्
मध्ये नीलसरोजकोमलरुचिं रामं भजे श्यामलम् ॥ १ ॥

आदौ रावणमर्दनं द्विजगिरा तीर्थाटनं सीतया साकेते दशवाजिमेधकरणं पत्न्या विलासाटनम् ।
स्त्रीपुत्रग्रहण स्नुषार्थमटनं पृथ्व्याश्च संरक्षणं रामार्चादिनिरूपणं दयितया स्वीय स्थलारोहणम् ॥ २ ॥

एकदा पार्वती देवी शंकरं प्राह हर्षिता । कैलासवासिनं नत्वा रामभक्त्यैकवत्सला ॥ ३ ॥

पार्वत्युवाच

शंभो त्वया पुराणानि कथितानि ममांतिके । रघुनाथस्य चरितं जन्मकर्मसमन्वितम् ॥ ४ ॥
कथयस्वाधुना देव मम प्रीतिविवर्द्धनम् । आनन्ददायकं कर्म रघुवीरेण यत्कृतम् ॥ ५ ॥


श्रीवाल्मीकि मुनि कहते हैं कि जिनके बायें भागमें सीताजी, सामने हनुमान, पीछे लक्ष्मण, दोनों बगल शत्रुघ्न और भरत वायव्य ईशान अग्नि तथा नैऋत्यकोणमें क्रमशः सुग्रीव, विभीषण, तारापुत्र युवराज अङ्गद और जाम्बवान् हैं उनके बीच विराजमान श्याम कमलसदृश मनोहर कान्तिवाले परमपुरुषोत्तम भगवान् श्रीरामचन्द्रजीका मैं भजन करता हूँ ॥ १ ॥ इस ग्रन्थके सारकांडम ऋषिवाक्यसे दुष्ट रावणका हनन, दूसरे यात्राकांडमें सीताके साथ रामकी तीर्थयात्रा, तीसरे यागकांडमे अयोध्यामें दस अश्वमेध यज्ञ, चौथे विलासकांडमे पत्नीके साथ विलास, पाँचवें जन्मकांडमें लव-कुशकी उत्पत्ति तथा सीताकी पुनः स्वीकृति, छठें विवाहकांडमें लवकुशके विवाहके लिए प्रस्थान, सातवें राज्यकांडमें धर्मपूर्वक पृथ्वीका रक्षण, आठवें मनोहरकांडमें रामकी पूजा आदिका वर्णन और नवें पूर्णकांडमें सीतासहित भगवान् रामचन्द्रके स्वधाम पधारने आदिका सुन्दर चरित्र वर्णित है ॥ २ ॥ एक समय रामचन्द्रजीकी भक्तिमें तत्पर देवी पार्वतींने कहा हे शम्भो ! आपने बहुतसे पुराणोंकी सुन्दर कथा मुझे सुनायी । हे देव ! अब आप कृपा करके मेरी प्रीति बढ़ानेवाले रघुवीर रामचन्द्रके आनन्ददायक कर्म और उनके जन्म आदिकी मनोहर