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अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

Akbar Birbal Vinod (Stories of Justice, Wit and Humour)

by पारम्परिक लोक संग्रह

Source: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (origin)

DevanagariHindipublished292 pages

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१७२ अकबर बीरबल विनोद
सड़ी होने के कारण काली पड़ी हुई रोटी को बड़ी चाव से
खा रहा है। उसे देख बादशाह को मजाक करने की सूझी
और बीरबल को सम्बोधन कर बोला-“देखो बीरबल ! कुत्ता
काली को खा रहा है।” बीरबल अपने हाजिर जवाबी के
लिये तो विख्यात ही था, वह झट बोला-“पृथ्वीनाथ ! उसे
वही न्यामत है।” इसपर बादशाह कुछ चिड़चिड़ा सा गया
क्योंकि नियामत उसकी माता का नाम था और काली
बीरबल की माता का नाम था। उसने कहा-“बीरबल तुम
मेरी माता को कुत्तेको खिला रहा है।” बीरबल ने उत्तर दिया-
“क्या आप ने मेरी माता से पहले कुत्तेको नहीं खिलाया था?”
बादशाह ने उत्तर दिया-“मैं तुम्हारी माता को नहीं
उस काली रोटी के लिये कह रहा था।” बीरबल बोला-“मैं
भी तो यही कहा था कि रोटी चाहे कैसी भी सड़ी गली
क्यों न हो; परन्तु उसके लिये तो वही नियामत है।” बाद-
शाह संतुष्ट हो गया और उस समय से फिर बीरबल से कोई
दूसरा मजाक नहीं किया।


और क्या ? कढ़ी
एक दिन बीरबल को बिरादरी भोज में जाना था, अतएव
वह बादशाह से अवकाश लेकर भोज में शामिल हुआ। जब
भोजन करके लौटकर आया तो बादशाह ने उससे पूछा-
“क्यों बीरबल ! आज भोज में कौन २ सा पदार्थ खाये हो।”
बीरबल ने पहले तो उस जगह की सुन्दरता का वर्णन किया