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अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

Agastya Samhita of Sage Agastya with Commentary

by महर्षि अगस्त्य / पं. भवनाथ झा

DevanagariSanskritpublished337 pages

Page 116 of 337

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Page 116

दशमोऽध्यायः (55)
वासुदेवाय ते नित्यं तथा संकर्षणाय च।
प्रद्युम्नायानिरुद्धाय श्रियै शान्त्यै नमो नमः।।25।।
प्रीतै रत्यै नमो राम द्वितीयावरणात्मने।
निवृति, प्रतिष्ठा, विद्या और शान्ति जो आत्मा आदि चारों की शक्तियाँ
हैं, उन्हें प्रणाम। वासुदेव, संकर्षण, प्रद्युम्न, अनिरुद्ध इन चारो को प्रणाम। पुनः
श्रीः, शान्ति, प्रीति और रति जो इनकी शक्तियाँ हैं, उन्हें द्वितीयावरण में प्रणाम।
अग्रे हनूमान् सुग्रीवो भरतश्च विभीषणः ।।26।।
लक्ष्मणोऽप्यङ्गदश्चैव शत्रुघ्नो जाम्बवाँस्तथा।
धृष्टिर्जयन्तो¹ विजयः सुराष्ट्रो राष्ट्रवर्द्धनः ।।27।।
अकोपो धर्मपालश्च सुमन्तश्चाष्टमन्त्रिणः।
एतेभ्यो रामरूपेभ्यो युष्मभ्यं प्रणमाम्यहम् ।।28।।
आगे में हनूमान्, सुग्रीव, भरत, विभीषण, लक्ष्मण, अंगद, शत्रुघ्न, जाम्बवान्,
धृष्टि, जयन्त, विजय, सुराष्ट्र, राष्ट्रवर्द्धन, अकोप, धर्मपाल और सुमन्त ये आठ
मन्त्री हैं। ये सोलह, जो रामस्वरूप हैं, उन्हें प्रणाम।
इन्द्राग्नियमदेवेभ्यो सायुधेभ्यो नमो नमः।
नमो निर्ऋतये तुभ्यं वरुणाय नमो नमः।।29।।
वायवे धनदायाथ रुद्रायेशाय ते नमः।
ब्रह्मणेऽनन्तरूपाय दिक्पालायात्मने नमः।।30।।
अपने अपने अस्त्र-शस्त्रों के साथ इन्द्र, अग्नि, यम, निर्ऋति, वरुण, वायु,
कुबेर, रुद्र, ब्रह्मा और अनन्त इन दश दिक्पालों को प्रणाम।
तदायुधाय वज्राय शक्तये दण्डकाय च।
नमः खड्गाय पाशाय ध्वजाय च गदात्मने ।।31।।
त्रिशूलायाम्बुजायाथ चक्राय सततं नमः।
इनके अस्त्र-शस्त्र स्वरूप वज्र, शक्ति, दण्ड, खड्ग, पाश, ध्वज, गदा,
त्रिशूल, कमल और चक्र को सदा प्रणाम।
वसिष्ठो वामदेवश्च जाबालिर्गौतमस्तथा।।32।।
भरद्वाजः कौशिकश्च वाल्मीकिर्नारदस्तथा।

  1. घ. धृतिर्जयन्तो ।
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