अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)
Agastya Samhita of Sage Agastya with Commentary
by महर्षि अगस्त्य / पं. भवनाथ झा
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स्वर लिखें। पूर्व की तरह मालामन्त्र दलों पर लिखकर दशाक्षरी मन्त्र से संवेष्टित
कर ‘क’ आदि व्यञ्जन लिखें तथा दिशा और उसके कोणों में नरसिंह (क्ष्रौं) और
वराह के बीज (ह्रौं) लिखें।
एतद्यन्त्रान्तरं चात्र साङ्गावरणमर्चयेत्।
सौवर्णे राजते भूर्जे लिखित्वाचनमाचरेत् ।।19।।
इस यन्त्र अथवा दूसरे यन्त्र की पूजा अंगों एवं आवरण के साथ करें। इस
यन्त्र को सोना, चांदी या भूर्जपत्र पर लिखकर पूजा प्रारम्भ करें।
हुं जानकीवल्लभाय स्वाहा क्षौ हं विनिर्देशेत्।
दशाक्षरो वराहस्य नृसिंहस्य मनुः स्मृतः ।।20।।
“हुं जानकीवल्लभाय स्वाहा क्षौं हं” यह नृसिंह और वराह का दशाक्षर मन्त्र है।
ह्रीं श्रीं क्लीं चोंन्नमो ब्रूयात् ततो भगवते पदम्।
रघुनन्दनायेति पदं ¹ रक्षोघ्नविशदाय च ।।21।।
मधुरेति प्रसन्नेति वदनाय पदं वदेत्।
विशेषणं पञ्चमं च ब्रूयादमिततेजसे ।। 22 ।।
ततो बलाय रामाय विष्णवे नम इत्यपि।
ह्रीं श्रीं क्लीं नमो भगवते रघुनन्दनाय रक्षोघ्नविशदाय
मधुरप्रसन्नवदनाय अमिततेजसे बलाय रामाय विष्णवे नमः । ²
मालामन्त्र का स्वरूप - "ह्रीं श्रीं क्लीं ॐ नमः' बोलें। इसके बाद 'भगवते'
यह शब्द बोलें। इसके बाद 'रघुनन्दनाय' यह शब्द, फिर 'रक्षाघ्नविशदाय' भी
बोलें। तब 'मधुर' 'प्रसन्न' और 'वदनाय' बोलें। तब विशेष रूप से पाँचवाँ पद
'अमिततेजसे' यह बोलें। तब 'बलाय' 'रामाय' और 'विष्णवे नमः' यह भी
बोलें। इस प्रकार मन्त्र का ऐसा स्वरूप होगा- ह्रीं श्रीं क्लीं नमो भगवते रघुनन्दनाय
रक्षोघ्नविशदाय मधुरप्रसन्नवदनाय अमिततेजसे बलाय रामाय विष्णवे नमः।
मालामन्त्रोऽयमुद्दिष्टो नृणां चिन्तामणिः स्मृतः।
ॐश्रीं सीतायै वह्निजाया तु सीतामन्त्र उदाहृतः ।।23।।
- घ. रघुनन्दनाय पदं ब्रूयाद्रक्षोघ्नविशदाय च। 2. घ. में अनुपलब्ध।